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Showing posts from 2018
दिन  की भागदौड मे अनायास ही किताबो को रैक से उतारते हुए कपडे़ की उखडी़ सिलाई जोड़ते हुए कुछ जरूरी पेपर्स को प्रिन्ट होते निकलते देखते हुए ऐसे ही यू ही कभी अति सूक्ष्म पलो मे तुम्हारा उभर कर सामने आ जाना और फिर ये याद ना आना कि ये याद तुमपे कैसे मुड़ी ... अहसास दिलाता है कि तुम हो तो नही पर मै हूं... मै हूं ... और इस हाल पे छुप के बरसो से जो रोना है तुम्हारे ना होने मे जो ये होना है । यही बेचैनी है... यही सुकुन है बस।
नींद आँखों में आती नहीं हम फिर भी सो जाते हैं . दिन फिर वही मिलता है जहां हम छोड़ आते है। के इस मोड़ पे जिंदगी हैं ख्वाब देखती कई पलकों को छू के चांदनी हैं दूर जा सिमटी कही वो चांदनी मरीचिका आँखों में सिमटी ही नहीं कर दफ्न सीने में कही सपनो को किनारे छोड़ आते हैं। ख्वाबो से अपने रूठ कर ये सांस थमती हैं कहीं... तीनो पहर भाग कर आ लौट पड़ती है यही । वो धडकना लफ्ज़ का वो मचलना हर्फ़ का आँखों  में कितने बोल थे जैसे ठिठुरना सर्द का ये फजाए बिन कहे अब कुछ बोल पाते  नहीं ...            
बेड़ियाँ रेशम की नही लोहे की ही होती हैं । पहना देते हैं उसे  रेशम मे लपेट कर ज़मीन से लगे  हैं कदम नापते रहने को राशन की तरह ख्वाहिशों का हिसाब उंगलियाँ फिर भी फिरती हैं दीवारो पर  जैसे साँस लेने को कोई दरार उभर आएगी साँस जैसे धुआँ सिगरेट की तरह ऐश ट्रे मे बुझी एहसास सा आता हैं। नसरीन की तरह अफीम लेकर दीवारों के उपर उड़ने का धम्म से आ गिरती हैं  , सिरहाने एक आवाज़ "निर्लज्ज" !
Soch ... Ab aati nahi Lafz murjhaye Kyariyon me muh chhupaye baithe hain Asmaan sar par chadha baitha hain Shaam dhalti hain Kadmo ko wapas ghar le aane ko Bhor hoti nahi Bas din chadhta hain ... Yaadein yaad nahi aati Saanso ka hissa hi gayi hain Dard ab teesta nahi Saath chalta hain ... Ascharya hain mujhe tumne kaese Inse kavitaao ki imaratein laga di Unme logo ko bitha diya Sabki jgahe bana di Anubhuti aur sahanabhuti Ki ret lagao Tum hi likho geet Tum nazmo ke pahad lagao Mre liye ab bas ye cigrette ke dhuye jaesa hain Ek kash lekar Jahan me apne dard tak khicho Aur fir jamane ke muh pe ura do ... - Anvita