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Showing posts from August, 2019
दुकान में तह लगा एक सफेद कुर्ता उचक कर दुकानदार के सामने आ गिराऔर नाराजगी से कहा"मुझे तुम होली में भी बेच रहे ईद में भी बेच रहे,मुझे भी कोई रंग और पहचान ‌दो" दुकानदार ने उसे कहा...
याद है तुम्हें? जबकि चाय तुम पीते नही थे, एक अलसायी हुइ दिसंबर की शाम यूही बैठ गये थे मेरे साथ, चाय पीने के बहाने। सुरज तपकर सिंदूरी रंग में पिघल ही रहा था की तुमने बातो की एक आं...
जलते हुए लम्हों की बड़ी बेबसी हैं  कौन कहता हैं चिरागों में केवल रौशनी हैं

सैंडवाच

अखबार की "ठक" आवाज के साथ दिन की तरफ भागता हुआ भोर सर पर सवार हो गया। वो भी भागती हुई दिन की तरफ दौड़ पड़ी। बच्चों का स्कूल,घर,आफिस...एक गहरी थकान के बाद देर रात घर पहुंचते ही नजर आया बेसुध सोया बच्चा .बालकनी मे बासी बंधा अखबार और मेज़ पर रखा फिसलते रेत का एक सैंडवाच ...।

अखबार

हर रात तुम्हारी ख़ामोशी को मैं चांद सा सोचा करू हर सुबह बिखरी किरणों सा तुम्हें धुप धुप सेका करू। हर भोर तुम्हें पढ़ा करू हर कोर तुम्हें लिखा करू और तुम मुस्कुरा कर पढ़ो म...