अनकही

 शब्दो से परे कुछ गहरे एहसास

मिट्टी में बोए बीजो की तरह

नही आते सतह तक

कभी मिट्टी की ठसक

कभी नरमी की कमी

कभी धूप से अलग

पनप उठते है

किसी अलमारी के पुरानी डायरी मे

कभी काफी के प्याले के तैरती भाप में 

दिलो के बीच की चुप झांकती हैं

ऐसे ही कुछ अनकही

न कहने से जिंदा रहती है  ।

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