नही हैं !

ये किस सफर में हम हैं
की सफर हम में नही हैं ।

कहते हैं खुशामदीद 
जब हो मलाल में ।
सारे हैं मगर बस ये
हुनर हम में नही हैं।

तुमको बहुत सलीकेदार 
लगती हैं ये दुनिया
ये दुनिया हैं दुनिया
कोई मेहर हम में नही हैं ।

हम क्यू मलाल रखेंगे
अब उसकी बात का 
जब उसकी बात का 
कोई असर हम पे नहीं हैं ।

तुमको भी खुदगर्ज 
लगती हैं ये दुनिया ?
जबकि इखलास का
जरा भी असर तुम में नही हैं ।

ये किस सफर में हम हैं
की सफर हम में नही हैं ।


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