सैंडवाच
अखबार की "ठक" आवाज के साथ दिन की तरफ भागता हुआ भोर सर पर सवार हो गया।
वो भी भागती हुई दिन की तरफ दौड़ पड़ी। बच्चों का स्कूल,घर,आफिस...एक गहरी थकान के बाद देर रात घर पहुंचते ही नजर आया बेसुध सोया बच्चा .बालकनी मे बासी बंधा अखबार
और मेज़ पर रखा फिसलते रेत का एक सैंडवाच...।
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